3 : 314 ح 972 - 3 : 315 ح 975 - 3 : 315 ح 976 - 4 : 82 ح 237 - 4 : 82 ح 238 - 4 : 83 ح 441 - 4 : 158 ح 442 - 4 : 178 ح 493 - 4 : 211 ح 613 - 4 : 223 ح 655 « 1 » - 4 : 224 ح 657 « 2 » - 4 : 237 ح 695 - 4 : 252 ح 748 « 3 » - 4 : 271 ح 819 - 4 : 271 ح 821 « 4 » - 4 : 284 ح 859 - 4 : 299 ح 904 - 5 : 11 ح 28 - 5 : 48 ح 146 - 5 : 53 ح 161 - 5 : 72 ح 235 - 5 : 91 ح 300 - 5 : 143 ح 474 - 5 : 153 ح 503 - 5 : 159 ح 531 - 5 : 162 ح 541 - 5 : 176 ح 591 - 5 : 178 ح 598 - 5 : 186 ح 619 - 5 : 187 ح 623 - 5 : 204 ح 680 - 5 : 205 ح 686 - 5 : 208 ح 696 - 5 : 214 ح 722 - 5 : 215 ح 724 - 5 : 217 ح 731 - 5 : 228 ح 771 - 5 : 232 ح 785 - 5 : 246 ح 834 - 5 : 247 ح 836 - 5 : 249 ح 844 - 5 : 255 ح 865 - 5 : 256 ح 869 - 5 : 260 ح 884 - 5 : 278 ح 951 - 5 : 279 ح 953 « 5 » - 5 : 279 ح 954 « 6 » - 5 : 296 ح 1003 - 5 : 301 ح 1023 - 5 : 302 ح 1028 - 5 : 302 ح 1030 - 5 : 304 ح 1039 - 5 : 305 ح 1041 - 5 : 314 ح 1083 - 5 : 335 ح 1152 - 5 : 337 ح 1165 - 5 : 337 ح 1166 - 5 : 338 ح 1170 - 5 : 340 ح 1179 - 5 : 343 ح 1187 - 5 : 351 ح 1219 - 5 : 363 ح 1264 - 5 : 364 ح 1269 - 5 : 365 ح 1271 - 5 : 366 ح 1277 - 5 : 375 ح 1307 - 5 : 390 ح 1363 - 5 : 402 ح 1398 - 5 : 423 ح 1467 - 5 : 423 ح 1468 - 5 : 453 ح 1585 - 6 : 15 ح 33 - 6 : 21 ح 47 - 6 : 206 ح 474 - 6 : 207 ح 475 - 6 : 230 ح 559 - 6 : 244 ح 611 - 6 : 246 ح 623 - 6 : 249 ح 639 - 6 : 250 ح 640 - 6 : 250 ح 641 - 6 : 254 ح 659 - 6 : 263 ح 700 - 6 : 269 ح 725 - 6 : 270 ح 731 - 6 : 273 ح 744 - 6 : 337 ح 935 - 6 : 338 ح 942 - 6 : 365 ح 1050 - 6 : 389 ح 1164 - 6 : 390 ح 1166 - 6 : 394 ح 1185 -
هامش
( 1 ) - رواه في الإستبصار 1 : 224 ح 794 ، وفيه : الحسين ، فقط .
( 2 ) - رواه في التهذيب 3 : 208 ح 496 والإستبصار 1 : 223 ح 792 عن سعد بن عبداللَّه عن أحمد بن محمّد عن الحسينبن سعيد .
( 3 ) - رواه في الإستبصار 2 : 112 ح 367 ، وفيه : فضالة بن أيّوب .
( 4 ) - رواه في الاستبصار 2 : 82 ح 251 ، وفيه : سعد بن عبد الله ، عن أحمد بن محمّد ، عن الحسين بن سعيد .
( 5 ) - رواه في الإستبصار 1 : 298 ح 1101 عن أبي الحسين بن أبي الجيد القمي ، عن محمّد بن الحسن بن الوليد ، عنالحسين بن الحسن بن أبان ، عن الحسين بن سعيد .
( 6 ) - رواه في الاستبصار 1 : 298 ح 1102 ، وفيه : عن أبي الحسين بن أبي الجيد القمي ، عن محمّد بن الحسن بن الوليد ، عن الحسين بن الحسن بن أبان ، عن الحسين بن سعيد .